श्वेतपोश अपराध एवं समाज तथा कारागार



वर्तमान समाज अत्याधिक गतिशील है। इस गतिशीलता की वजह समाज के ढाॅचे और कार्यो में जटीलता आती-जाती है, जिसके परिणाम स्वरूप समाज में अनेक समस्या पैदा होने लगती है। आज अपराध केवल उन व्यक्तियों के द्वारा नही किये जा रहे है, जिनके जीवन में शुन्यता एवं अभाव है। बल्कि आधुनिक समाज में अब अपराध वह वर्ग भी कर रहा है, जिसके जीवन में कोई अभाव एवं कमी नही है। जिसकी आर्थिक स्थिती खराब भी नही है, समाज में इस प्रकार के अपराध उन व्यक्तियों के द्वारा किये जा रहे हैं जिनकी समाज में सम्मान एवं प्रतिष्ठा उच्च है। ऐसे व्यक्तियों के द्वारा किया गया अपराध श्वेतपोश अपराध अथवा "White Collar Crime" कहा जाता है। इस प्रकार धनी, सुसभ्य, सुसंस्कृत, एवं सुशिक्षित सामाजिक पृष्ठ भूमि से संबंधित लोग भी गैरकानूनी कृत्य कर रहे है। यही नही नेता, मंत्री, संत्री एवं उच्च अधिकारी भी इस प्रकार के कार्य करने में पीछे नही हटते है। उद्योगपति अथवा औद्योगिक संगठनों, व्यवसायों अथवा इनके प्रशासकों के द्वारा भी ऐसे अपराध किये जा रहे है। उदाहरणतः यदि किसी दलाल ने अपनी पत्नि के प्रेमी को अपनी बंदूक की गोली चलाकर मार डाला है, तो वह श्वेतपोश अपराध की श्रेणी में नही आयेगा, परन्तु उसने यदि अपने व्यापार के संबंध में अपने व्यापारिक लाभ के लिये योजनाबद्ध तरीके से कानून एवं नियमों को तोड़ा हो , तब वह श्वेतपोश अपराध की श्रेणी में माना जावेगा। इस प्रकार के अपराध व्यक्ति के द्वारा किये गये अपराधों से भी ज्यादा खतरनाक होते है, क्योंकि इस प्रकार के अपराध में पीड़ित व्यक्ति को यह एहसास भी नही हो पाता है कि उसका शोषण कब हो गया है। इस प्रकार यह अवैध क्रियाऐं, इस प्रकार के अपराधियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, क्योंकि आधुनिकता एवं इंटरनेट की वजह से इस प्रकार के अपराधी बहुत अधिक सक्रिय है। जैसे-जैसे समाज एवं देश में पूॅजीवादी विचारधारा मजबूत होती जायेगी, वैसे-वैसे श्वेतपोश अपराध भी बढ़ते जायेगे। इन अपराधियों के अपराध का पता लगाना बहतु कठिन होता है, यदि पता भी लग जाये, तब इनको गिरफतार करना और भी कठिन होता है, और यदि इनको गिरफतार भी कर लिया जाये, तो वह स्वयं कानून की प्रकृति एवं अवधारणा बदल देते है, क्योंकि यह प्रायः न्यायालयों के न्यायाधीश, अधिवक्ता, नौकरशाह एवं राजनैतिक व्यक्ति होते है। यह अपने अपराधों से बचने के लिये न्यायालयों में एन केन प्रकरण वर्षो तक प्रकरण लंबित करवाते है, जिसका निराकरण अपराधी के मरने के बाद ही होता है। इस प्रकार श्वेतपोश अपराधी कानूनों का जानकार होता है, उसको यह ज्ञात होता है कि उसके द्वारा किया गया कृत्य दिवानी और फौजदारी के सामान्य न्यायालयों के अंतर्गत नही आते है एवं इनका निराकरण यह न्यायालय नही कर सकते है। यह एक प्रकार का संगठीत अपराध है जो गिरोह की तरह कार्य करता है, इनमें उच्च प्रतिष्ठा रखने वाले समाज के सभी सभ्य नागरिक शामिल होते है। यह अपने अपराधो को छुपाने के लिये समाचार पत्र, पत्रिकाऐं, एवं टीवी. चैनलों का भी सहारा ले लेते है। इस प्रकार के अपराधों के प्रति समाज कठोर इसलिये नही होता है कि आहत व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से न्यूनतम क्षति होती है, इसलिये वह लापरवाह हो जाता है। श्वेतपोश अपराधियों में दूरदर्शीता बहुत अधिक पाई जाती है।

श्वेतपोश अपराध की समस्या मनुष्य की अत्याधिक धन प्राप्ति, भौतिक सुख-सुविधाओं एवं ऐशो आराम में वृद्धि तथा विलासतावादी वस्तुओं को संग्रह करने की होती है। व्यापारी गलत उत्पादन, नकली वस्तुओं बेचने के लिये झूठे विज्ञापन, नकली टेड्र मार्क, कालाबाजारी, दवाईयों में मिलावट, खातों में गड़बड़ी, चिकित्सय नकली प्रमाण-पत्र, झूठी मेडीकल रिपोर्ट, औषधी मिलावट, अवैध गर्भपात, नौकरशाह में घूसखोरी करना, सभी श्वेतपोश अपराध की श्रेणी में आते है। यह तक की धार्मिक संस्थाऐ भी श्वेतपोश अपराध से नही बच पा रही है क्योंकि इनके द्वारा भी कई प्रकार के अनैतिक कार्य समाज में देखे जा रहे है। जिससे समाज बहुत आहत हैं !


संतोषकुमार लड़िया